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Wild kiss

एक लड़की दुल्हन के जोड़े में सज धज के किसी मूर्ति की तरह बैठाई गई थी, उसे देखकर ऐसे लग रहा था जैसे उसमें जान ही ना हो बेजान किसी पुतले की तरह वह बेड पर तैयार होकर बैठी हुई थी। उसमें कोई हरकत ही नहीं हो रही थी तभी कमरे का दरवाजा खुला और दो औरतें अंदर आई वह दोनों ही आपस में बात कर रही थी एक और दूसरी औरत से बोलता है बेबी जल्दी कर इस लड़की को किसी तरह अपने घर से दूर फेंक यह भला जिसके सर जाए उसके सर जाए लेकिन हम इसे अपने सर से तो उतार फेक पता नहीं किसकी बला थी। जो तेरे ससुर ने तेरे सिर पर पटक दिया। उसे औरत की बातें सुनते हुए वह जो उसके साथ वाली औरत थी जिसका नाम बेबी था उसने कहा वही तो यह कल वही करमजाली मेरे नसीब में आकर गिर पड़ी क्या करूं मैं कितनी कोशिश की से यहां से निकलने की लेकिन यह तो जैसे मेरी किस्मत में कुंडली मार के बैठ गई थी। अब इस लड़की को तो मैं किसी तरह से अपने घर से बाहर फिटकरी रहूंगी इसके बाद मेरी भी बेटी है मुझे उसकी भी पढ़ाई दिखाई देखनी है कौन सी यह मेरे काम में आ जाएगी अरे जाएगी पता नहीं किसका खून है कैसे खून है मुझे तो लगता है किसी का गंदा खून होगी जो इसकी मां से पाठक के चली गई तो मेरे ससुर जी महान बनते हुए इसे मेरे सर पर लाकर छोड़ गए खुद तो ऊपर चले गए और इसका अंजलि को मेरे ऊपर छोड़ कर चले गए मैं चलो इसको देखो। आप तो जाते-जाते कुछ फायदा ही ले लो इससे वैसे भी बड़ी मेहनत की है मैंने इसे पालने में वह औरत बच्चे अपनी होठों पर शातिर मुस्कान दिए उसे लड़की को देखते हुए अपनी कड़वी बातें बोले जा रही थी।

कमरे में एक पल को सन्नाटा छा गया। लड़की—जो अब तक मूर्ति सी चुपचाप बैठी थी—ने अपनी भारी-सी पलकें उठाईं। उसकी आँखों में न आँसू थे, न कोई चिंगारी, बस गहरी, थमी हुई थकान। मानो सारी भावनाएँ किसी ने उससे चूस ली हों।

बेबी ने पास रखी चुन्नी को झटके से ठीक किया, जैसे कोई सामान को अंतिम बार सजाता है, फिर दूसरी औरत से बोली,

"चल, जल्दी कर। बाहर गाड़ी खड़ी है। जितनी देर करेंगे, उतनी दिक्कत होगी।"

दूसरी औरत ने धीमे से लड़की का हाथ पकड़ने की कोशिश की, पर उसकी उंगलियाँ बर्फ सी ठंडी थीं।

"अरे... देख तो, बिलकुल ठंडा पड़ रहा है ये। कहीं..."

"कुछ नहीं हुआ है," बेबी ने बीच में काटते हुए कहा, "डर मत, ये तो बस चुप है... हमेशा की तरह।"

लड़की के मन में हल्की-सी हलचल हुई। आवाज़ें उसके कानों में गूंज रही थीं—फेंक दो, गंदा खून, किसी का बोझ...

उसका गला सूख रहा था, लेकिन वह बोल नहीं सकी।

दरवाज़े के बाहर जैसे किसी ने कदमों की आहट दी। बेबी ने झट से पर्दा खींचा और लड़की को खड़ा करने की कोशिश की।

"उठ! चल! तेरा यहाँ कोई नहीं है... अब तो तू बस वहीं जाएगी, जहाँ तेरी किस्मत खींच ले जाए।"

लड़की ने धीमे से अपना चेहरा घुमाया और बेबी की आँखों में देखा—पहली बार, बिना झपकाए। बेबी को उस नज़र में कुछ ऐसा दिखा कि उसके हाथ अपने-आप ढीले पड़ गए।

बाहर से दरवाज़ा ठक की आवाज़ के साथ खुला।

और तभी...

एक कर्कश आवाज सुनाई दी बेबी जल्दी करो नीचे मलिक इंतजार कर रहे हैं। आवाज को सुनते ही baby ने जल्दी से उसे लड़की को उठाया और बाहर ले जाते हुए दूसरी औरत से बोली इसके साथ वाला वह बैग लेकर आ जिसमें इसके थोड़े फटे पुराने कपड़े रखें हुए हैँ। अब जाते ही तो कोई इसके लिए कपड़ों का इंतजाम नहीं करेगा और मैं इतनी बुरी भी नहीं हूं कि किसी को ऐसे ही बिना कपड़े के भेज दी दो-चार कपड़े डाल दी है मैंने इसकी बैग में इतने में ही गुजारा कर लेगी, baby की बात सुनकर उसके साथ आई हुई औरत ने पीछे रखा एक छोटा सा बैग उठाया और बाहर की तरफ निकल गई।

वह दोनों ऊपर से सीढ़ियां उतरते हुए नीचे आए और नीचे से दरवाजे से बाहर की तरफ आई जहां एक बड़ी सी ब्लैक कार खड़ी हुई थी। ड्राइवर ने आकर उसे कार का दरवाजा खोला और उन दोनों औरतों ने उसे लड़की को कार में धकेलते हुए बैठा दिया। उसे लड़की ने अभी कोई हरकत नहीं करी थी बस उसकी आंखों के सामने कुछ पुराने मंजर घूमने लगे थे।

एक लड़का और एक लड़की दीवार से सटे एक दूसरे को पैशनेटली चूम रहे थे। कोई हार मानने को तैयार नहीं था। दोनों ही एक दूसरे के बालों को खींचते हुए एक दूसरे के मुंह में अपना टेस्ट छोड़ रहे थे। उनकी किस्त इतनी डीप थी कि दोनों की साँसे घटने लगी थी। लेकिन इस कंडीशन में भी कोई पीछे नहीं है रहा था। दोनों ही एक दूसरे को वाइल्ड तरीके से किस कर रहे थे। अपने देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था कि वह अभी एक दूसरे को छोड़ने वाले हैं।

आगे जारी....

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