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मै तुमसे प्यार नहीं करता

उसे लड़के की बात सुनकर सामने खड़ा हुआ लड़का जो उसी का भाई था उसने कहा तुम पागल हो गया है ऐसी लड़की से प्यार कैसे कर सकता है। इस बार उसका भाई जो उससे छोटा था उसने कहा मुझे नहीं पता भाई मैं शादी करूंगा तो सिर्फ इसी करूंगा। नहीं तो किसी से नहीं उसे लड़की की जिद देखकर आखिर सामने वाला लड़का हार ही गया। लेकिन उसने उसे लड़की को समझाते हुए कहा इसके लिए हमें चाचू से बात करनी पड़ेगी। अगर उन्होंने तुम्हारी शादी के लिए हां का तभी मैं कुछ कर सकता हूं।

और वैसे भी तुम्हारी शादी स्वरा के साथ होने वाली है तो तुम ऐसे अचानक ये बात कहोगे तो मै कैसे समझाऊंगा सब को इस बात पर वह लड़का बोला भाई मैं स्वरा से प्यार नहीं करता और मुझे उससे कोई शादी नहीं करनी मुझे सिर्फ रिया चाहिए। उसे लड़की की बात सुनते हुए दरवाजे पर खड़ी लड़की जो कोई और नहीं स्वरा ही थी उसके कदम डगमगा आ जाते हैं।वो गिरने को होती है लेकिन फिर खुद को दरवाजे के सहारे से रोक लेती है। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे लेकिन उसने एक शब्द कहा नहीं था वह बस चुपचाप खड़ी सब देखती रही।

उसे ऐसे देखकर वह आदमी जिसका नाम विवेक था उसने कहा स्वरा प्लीज संभालो खुद को देखो इसे माफ कर दो इसे नहीं पता था कि दिल के मामले में कैसे और कब बात करनी होती है मैं मानता हूं इसकी गलती है इसे तुम्हें पहले ही बता देना चाहिए था कि यह तुमसे प्यार नहीं करता लेकिन यह बच्चा है प्लीज इसे माफ कर दो।

विवेक की रिक्वेस्ट सुनकर स्वरा ने धीरे-धीरे सिर उठाया। उसकी आँखों में आंसुओं की चमक थी लेकिन चेहरे पर हैरानी से ज़्यादा ठहराव था।

उसने कांपती आवाज़ में कहा,

“माफ कर दूँ, विवेक?… ऐसी बात छुपाना कोई छोटी गलती होती है क्या? ये तो मेरी पूरी ज़िंदगी, मेरे सपनों और मेरे परिवार की इज्ज़त से खेलना था।”

कमरे में सन्नाटा फैल गया।विवेक भी चुप हो गया और रिया के चेहरे पर घबराहट साफ़ दिख रही थी।

स्वरा ने उस लड़के की तरफ़ देखा जिसकी शादी उससे होने वाली थी। उसकी आवाज़ अब साफ़ थी,

“तुम्हें कभी ये हिम्मत नहीं हुई कि मुझसे सच कह सको। तुमने मुझे भरोसा दिलाया, मेरे सपनों को जगह दी, और अब… अब कहते हो कि तुम मुझसे कभी प्यार ही नहीं करते थे। क्या मैं इतनी बुरी हूँ?”

इतनी बुरी हूँ भी तो तुमने दादा जी से क्यों नहीं कहा कि तुम मुझसे शादी नहीं करना चाहते। मैं तो नहीं आई थी तुमसे कहने की मुझसे शादी करो तुम्हारी फैमिली रिश्ता लेकर आई थी हमारे घर अगर मैं तुम्हें पसंद नहीं थी तो तुम इस समय बोल देते लेकिन तुमने यह बहुत गलत किया ऋषि तुम्हारी वजह से मेरे दादाजी के सपने टूटे कैसे बताऊंगी मैं उन्हें क्या कहूँगी मै उन्हें वो टूट कर बिखर जाएंगे। कितने ही सपने देखे थे उन्होंने मेरे और तुम्हारे लिए...

उसकी बात सुनते हुए ऋषि कुछ बोलना चाहता था लेकिन शब्द गले में अटक गए।

स्वरा ने आँखें पोंछते हुए ठंडे स्वर में कहा,

“ठीक है… अगर तुम्हें रिया चाहिए तो मैं रास्ते से हट जाती हूँ। लेकिन याद रखना—प्यार सिर्फ़ जिद या जज़्बात से नहीं चलता। ये जिम्मेदारी भी मांगता है। और जिस इंसान को अपनी सच्चाई बोलने की हिम्मत नहीं है… वो किसी का भी सहारा नहीं बन सकता।”

उसके ये शब्द सुनकर विवेक भी चुप हो गया। उसे समझ आ गया था कि बात अब आसान नहीं रही।

स्वरा ने आख़िरी बार उन तीनों की तरफ़ देखा और दरवाज़े से बाहर निकल गई। उसके कदम डगमगाए ज़रूर, मगर उसकी रीढ़ सीधी थी।

पीछे खड़ा ऋषि उसे रोकना चाहता था, लेकिन विवेक ने हाथ पकड़कर कहा,

“मत जाओ। अभी ये ज़ख्म ताज़ा है, उसे अपने तरीके से सहने दो। शायद यही सबक हमें भी सिखाएगा कि रिश्तों का मज़ाक उड़ाने की कीमत कितनी बड़ी होती है।”

कमरा भारी खामोशी में डूब गया।

रिया की सांसें तेज़ थीं, लड़का उलझन में था, और विवेक के चेहरे पर एक बोझिल गंभीरता थी।

रिया का चेहरा पीला पड़ चुका था। उसकी धड़कनें इतनी तेज़ थीं कि जैसे सीने से बाहर निकल आएंगी।

उसके मन में सिर्फ़ एक ही डर घूम रहा था—“अगर दादाजी को पता चल गया तो?… अगर उन्होंने मुझे जायदाद से बेदखल कर दिया तो?”

उसे अपने किए की शर्म नहीं थी। उसे इस बात का बोझ नहीं था कि उसकी वजह से स्वरा की ज़िंदगी बिखर रही थी।

नहीं… उसे तो सिर्फ़ अपनी हक़दारी खोने का डर सता रहा था।

वह घबराकर ऋषि के पास गई और फुसफुसाते हुए बोली,

“देखो ऋषि, अब जो हो चुका है उसे कोई बदल नहीं सकता। लेकिन हमें दादाजी के सामने यह बात बहुत सोच-समझकर रखनी होगी। अगर उन्हें ग़लत अंदाज़ में पता चला तो समझ लो सब गया।”

आगे जारी..।

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